उत्तर प्रदेश

*बलिया: नागाजी सरस्वती विद्या मन्दिर भोजापुर बैरिया में तिरंगा सप्ताह पर प्रांतीय अधिकारियों का मार्गदर्शन*

रिपोर्ट : कुंवर अजय सिंह "मन्टु"

*बलिया: नागाजी सरस्वती विद्या मन्दिर भोजापुर बैरिया में तिरंगा सप्ताह पर प्रांतीय अधिकारियों का मार्गदर्शन*

रिपोर्ट : कुंवर अजय सिंह “मन्टु”

बैरिया/बलिया उप्र: १७ अगस्त २०२२ दिन बुधवार को नागाजी सरस्वती विद्या मन्दिर भोजापुर बैरिया में तिरंगा सप्ताह के समापन पर भैया बहनों को प्रांतीय संगठन मंत्री श्रीमान रामय जी, शिशु शिक्षा समिति गोरक्ष प्रान्त के प्रदेश निरीक्षक श्रीमान राम सिंह जी , बलिया संभाग के संभाग निरिक्षक श्रीमान कन्हैया चौबे जी, सरस्वती शिक्षा परिषद् माल्देपुर के प्रबंधक श्रीमान अनिल सिंह जी मार्गदशन प्राप्त हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी मां शारदे की वन्दना से प्रारंभ हुआ।

आगंतुक अधिकारी बंधुओं का परिचय विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ राजेन्द्र पाण्डेय जी ने कराया ।
सरस्वती शिक्षा परिषद् माल्देपुर के प्रबंधक श्रीमान अनिल सिंह जी ने प्रांतिय अधिकारी बंधुओ को अंग वस्त्रम से सम्मानित किया।

भैया बहनों को संबोधित करते हुए प्रदेश निरीक्षक श्रीमान राम सिंह जी ने बताया की आज के परिवेश में जिस प्रकार का बदलाव देखने को मिल रहा उसमें अंग्रेजियत पूरी तरह दिखाई दे रही है। मैकाले द्वारा भारतीय शिक्षा को समाप्त कर के पाश्चात्य सभ्यता को अंगीकार कराना, उसका कहना था भारतीय शरीर से भारतीय होंगे पर अन्दर से पाश्चात्य संस्कृति के उपासक होंगे। आज कल जन्म दिन पर बच्चों द्वारा केक काटना, मोमबत्ती बुझाना, माता पिता को मोम डैड कह कर संबोधित करना, चरण स्पर्श नहीं करना। देश की आजादी के बाद मैकाले द्वारा कई बातो को हमारे ऊपर थोपा गया। इस अव्यवस्था, भारतीय संस्कृति का लोप होता देख विद्या भारती शिक्षण संस्थान शुरु किया गया। जहां हम बच्चों में संस्कार युक्त भारतीय पद्धति की शिक्षा दी जा सके। जिससे आगे वो बच्चे राष्ट्र भक्ति से परिपूर्ण हो। उन्होंने मार्कण्डेय महादेव की कहानी से बच्चों को प्रेरणा लेने का निर्देशन दिया। किस प्रकार एक अल्प आयु का बालक अपनी भक्ति से चिरंजीवी होता है।


आगे संगठन मंत्री श्रीमान रामय जी ने भैया बहनों की ने बताया हमारा विज्ञान कितना पुराना है कि आज जो कुछ भी हमें गलत इतिहास पढ़ाया जा रहा जिसका श्रेय अंगेजो ने ले लिया जबकि इन सबकी खोज हमारे मनीषियों ने कई सौ वर्ष पूर्व कर दिया था। हमारा इतिहास इतना पुराना है जिसे छोटे छोटे पहलुओं से जाना जा सकता है।
कल्प, मनवंतर, युग, चतुष्क युग इन सबके बारे में विस्तार से बताया।


उन्होने बताया हमारा राष्ट्र मृत्युञ्जय राष्ट्र है। युग के बारे मे बताते हुए बताया की एक कलयुग ४३२००० वर्ष का होता है, २ कलयुग वर्ष के बराबर एक द्वापर युग, ३ द्वापर युग के बराबर एक त्रेता युग, ४ त्रेता युग के बराबर एक सतयुग, १० कलयुग के बराबर एक महायुग तथा १०००० महायुग के बराबर ब्रह्मा जी का एक दिन होता है।
आगे उन्होंने बताया की हमें सही इतिहास पढ़ना चाहिए,१९४७ में हम स्वाधीन हुए स्वतंत्रता अभी बाकी है।
अपना देश कभी परतंत्र नहीं हुआ, भारत में छः विदेशी आक्रमण हुए जिसका भारत ने हर भर प्रतिकार किया।
छः आक्रमणकारी में यूनानी, शक , कुषाण, हूण, मुसलमान अन्त में ईसाई आए।
कई युद्ध की चर्चा भी किए जिसमें मिश्र की महारानी सिरेथिस द्वारा २ लाख सैनिकों द्वारा आक्रमण जिसमे केवल ७ ही बच कर गए।
१५४२ में भारत में पहला चर्च बना।
७१२ में मुसलमान आए।


देश की परम्परा तीन जगह से पोषित होती है इतिहास, शिक्षा और भाषा । हमें उन्हें साथ लेकर चलना होगा और आने वाली पीढ़ियों को सही इतिहास पढ़ना होगा, राष्टीय भाषा का सम्मान और उसका उपयोग गर्व से करना।
भारत में संस्कृत अंग्रेजी में पढ़ाई गई क्योंकि मैक्समूलर नहीं चाहता था की संस्कृत भारत में पढ़ी जाए।
हम सभी को अपने क्रांतिकारियो के बारे में पढ़ना चाहिए जिन्होंने भारत को स्वाधीनता दिलाने में अपने आप को आहूत कर दिया।
आगन्तु अधिकारी बंधुओ का आभार प्रदर्शन विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ राजेन्द्र पाण्डेय जी ने किया
अधिकारी बंधुओ ने आचार्य परिवार के साथ परिचयात्मक बैठक किया।
संगठन मंत्री श्रीमान रामय जी ने विद्यालय के छात्र संसद के पदाधिकारी बंधुओं के साथ बात की तथा उनका मार्गदर्शन किया। प्रदेश निरीक्षक श्रीमान राम सिंह जी ने कक्षा दशम के भैया बहनों से बात की तथा उन्हें अपनी शिक्षण व्यवस्था पर और तनमयता के साथ लगने को कहा।

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